बालोद।
चार माह पहले बालोद जिला मुख्यालय में पत्रकार पर हुए हमले में पुलिस की चुप्पी बरकरार है। कार्यवाही के नाम पर पुलिस के जिम्मेदार समय को टालते जा रहे हैं। एक तरफ जहां हर माह बालोद जिला पुलिस अधीक्षक लंबित प्रकरणों के निराकरण को लेकर मीटिंग आहूत कर कड़े निर्देश दे रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कोतवाली थाने के जिम्मेदार ड्यूटी के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहे हैं।
दरअसल 26 अक्टूबर 2022 को बालोद मुख्यालय के एक पत्रकार के ऊपर दर्जनों सरफिरे युवकों ने हमला किया जिसमें पत्रकार बुरी तरह घायल हो गया। जिसके बाद पत्रकार ने कोतवाली थाने में सभी युवकों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। मामला दर्ज होने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 4 माह बीत जाने के बाद भी कोतवाली थाने की ओर से न्यायालय में चालान पेश नहीं किया गया। जिसके चलते पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर
पत्रकार पर हमला होने का मामला उस पत्रकार ने उसी दिन दर्ज करवा दिया था और आरोपी का नाम भी पुलिस की ज़हन और एफआईआर में है। बावजूद इसके मुख्य आरोपी राम नेताम अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इसी बात का हवाला देते हुए पुलिस अब तक न्यायालय में चालान पेश नहीं कर पाई है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि 4 माह बाद भी पुलिस अब तक क्यों मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई।
लगातार हो रहे पत्रकारों पर हमले
छत्तीसगढ़ में बीते कुछ माह से लगातार पत्रकारों पर हमले होने के किस्से सामने आते जा रहे हैं लेकिन इससे पहले प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पत्रकारों पर हुए हमलों को लेकर पुलिस सक्रिय रही और आरोपियों को सलाखों के पीछे जल्द धकेल दिया लेकिन बालोद कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली से साबित हो रहा है कि वह आरोपियों को बचाने मैं लगे हुए हैं और मामले को लेकर निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
विभागीय मंत्री और सीएम से हो सकती है शिकायत
एक तरफ जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर तरह तरह के कानून बना रहे तो वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी फेरने का काम बालोद कोतवाली की टीम करती नजर आ रही है। मामले को लेकर जानकारी सामने आ रही है कि जिस पत्रकार के ऊपर हमला हुआ वह जल्द ही पूरे मामले की शिकायत और कोतवाली के जिम्मेदारों की करतूतों की जानकारी के साथ जल्द गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के पास मुलाकात कर सकते हैं।







