बालोद
किसानों को कमजोर समझने वाली केंद्र की असंवेदनशील सरकार को झुकने पर किसानों ने किया मजबूर, आखिर असत्य पर सत्य की हुई जीत, केन्द्र की ताना शाह सरकार जो उधोगपतियों के हितैसी बने हुए थे, किसानों के हित में बड़ी मजबूरी में देर से लिया फैसला, जब कई किसान इस आंदोलन में शहादत हो गई है, लोगों के लिये अन्न पैदा करने वाले देश के इन किसानों को 1 वर्ष की लंबी लड़ाई के बाद मिली बड़ी सफलता, आखिर 5 राज्य में चुनावी हार के बाद वापस लिया गया है किसान विरोधी काला कृषि कानून , केंद्र के असंवदेनशील सरकार मोदी जी किसानों से केवल क्षमा मांगने से कुछ नही होता है, अपने कर्म की शाखा को झिझोड़ना पड़ता है, तब कही हम सब के लिये अन्न पैदा होता है किसान, इस कारण से मेरी आप से मांग हैं कि, इस आंदोलन में शहादत हुए सभी किसानों के परिवार को 50-50लाख रु शासन की ओर से दिया जावे,। जय हिंद, जय जवान, जय किसान..
अधिवक्ता भेषकुमार साहू,
जिलाध्यक्ष- कांग्रेस कमेटी विधि प्रकोष्ट बालोद, छ ग
बालोद से अमजद चौहान की रिपोर्ट







