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टीबी संभावितों की सघन खोज के लिए 2 लाख से अधिक घरों में “टीबी हारेगा बालोद जीतेगा” के तहत डोर-टू-डोर सर्वे शुरु

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बालोद – राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में टीबी को खत्म  करने  के लिए एक बार फिर “टीबी हारेगा बालोद जीतेगा” अभियान का आज शुभारंभ किया गया। लोगों में जनजागरुकता लाने प्रचार-प्रसार के लिए संसदीय सचिव कुंवर सिंह निषाद, कलेक्टर जन्मेजय महोबे व सीएमएचओ डॉ.जेपी मेश्राम द्वारा हरी झंडी दिखाकर प्रचार रथ को रवाना किया गया। टीबी की सघन खोज एवं उपचार अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान जिले की 702 गांवों में लगभग 10 लाख की जनसंख्या में टीबी संभावितों को खोजने घर-घर जाकर सर्वे किया जाएगा।  दो  लाख से अधिक घरों में डोर-टू-डोर सर्वे मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, टीबी चैम्पियन व ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों की टीम टीबी के लक्षण वाले मरीजों की पहचान करेगी।

इस मौके पर जिला टीबी उन्न्मूलन अधिकारी डॉ. संजीव ग्लैड ने बताया: “जिले में टीबी मरीजों की पहचान करने और टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जा रहा । जिलेवासियों से अपील है कि डोर टू डोर सर्वे में यदि टीम के सदस्य किसी के घर पहुंचे तो टीबी के लक्षण वाले व्यक्ति अपने रोग को छिपाएं नहीं, बल्कि लक्षणों के बारे में खुलकर बताएं। टीबी रोग की पुष्टि होने पर उनका समुचित इलाज होगा।‘’

डॉ. ग्लैड ने बताया, वर्तमान में जिले में जनवरी से अगस्त 2021 तक सीबी नॉट मशीन से 982 और 521 टू-नॉट मशीन से जिला टीबी अस्पताल में लगभग 1503 संभावित मरीजों की जांच की गई। जांच के बाद 535 टीबी के नए मरीजों की पहचान कर इलाज किया जा रहा है। ऐसे मरीजों की संख्या 13 है जिनमें सामान्य दवाइयों के स्थान पर एमडीआर टीबी की दवाई दी जा रही है।

उन्होंने बताया  एक सप्ताह या अधिक समय की खांसी, लंबे समय से बुखार आने, लगातार वजह घटने, सीने में दर्द, बार-बार लूज मोशन होने की स्थितियों में टीबी का जांच अवश्य करवाना चाहिए। इसके लिए अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में संपर्क किया जा सकता है। इलाज से टीबी की बीमारी पूरी तरह से ठीक हो सकती है। इलाज करवा रहे मरीज, टीबी रोधी दवा का पूरा सेवन करें। टीबी बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2025 तक और राज्य सरकार ने वर्ष 2023 तक का लक्ष्य तय किया है।

एनसीडी के सहायक जिला नोडल अधिकारी संदीप मेश्राम ने बताया अब ट्रू नाट मशीन की सहायत से जांच कर कीटाणु की सूक्ष्मतम मात्रा की भी पुष्टि हो जाती है। इससे संदिग्ध मरीजों को आसानी से पहचाना  जा सकता है। टीबी की जांच के लिए सैम्पल सभी स्वास्थ्य केंद्र में लिए जा रहे हैं। यह जांच बिल्कुल निशुल्क है। ट्रू नाट मशीन से जांच के साथ-साथ क्षय रोग के निदान में कारगर होने का पता 24 घंटे के अंदर लग जाता है।

शुभारंभ के मौके पर जिला कार्यक्रम समन्वयक अनिल कुमार भारद्वाज, जिला कोऑर्डिनेटर सत्येंद्र साहू, एसटीएस अल्पना कलिहारी, लैब टेक्निशियन किशोरी नाथ व पिनेश्वर साहू, अजय डडसेना व टीबी चैम्पियन भी उपस्थित रहें।

 

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